TET EXAM PRACTICE SANSKRIT : वन लाइनर नोट्स
संस्कृत: वन लाइनर नोट्स
‘ड’ का उच्चारण स्थान है— |
मूर्धा |
संस्कृत में अयोगवाह वर्णों की संख्या है— |
चार |
‘ए’ तथा ‘ऐ’ की स्वर संज्ञा पाणिनि को अभिहित............. है। |
नहीं |
“आत्मनेपदम्” इति पदम्— |
तिङन्तपदम् |
‘क् + अ + क् + ष + आ’ के योग से शब्द बनेगा— |
कक्षा |
‘अं’ एवं ‘अः’ वर्णों की संज्ञा है— |
अयोगवाह |
अकार के भेद हैं— |
अघोष |
‘भाग’ वाले तालु आदि स्थानों में जो अब ऊपरी भाग में बोला जाये, उसकी संज्ञा है— |
उदात्त |
‘ऋ’ वर्ण का उच्चारण स्थान है— |
मूर्धा |
‘आत्मनेपदम्’ पद में ‘उ’ प्रत्यय का विधान करने वाला सूत्र है— |
स्नानसंक्षेप उ: |
‘ट’ वर्ण का उच्चारणस्थान है— |
मूर्धा |
संस्कृत वर्णमाला में मूलस्वरों की संख्या है— |
पाँच |
‘यरोऽनुनासिकेऽनुनासिको वा’ सूत्र का उदाहरण है— |
एतन्न्यासि |
इन वर्णों की परस्पर सन्धि की गई है— |
ऋर् व् को |
‘अ’ ............ है। |
केन्द्रीय स्वर |
प्रत्यय के आदि में स्थित वर्णों और धातु की इट् करने वाला सूत्र है— |
इट् |
‘गम् अच्, विष्णु इत्यं’ पदों की सिद्धि करने वाला सूत्र है— |
इदुद्विद्वचनम् प्रयोजनम् |
ए और ऐ का उच्चारणस्थान है— |
कण्ठतालु |
वर्गों के द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्णों की संज्ञा होती है— |
महाप्राण |
टवर्ग: — |
ट ठ ड ढ ण |
वर्णमालायाः ............ व्यंजनानि सन्ति। |
33 |
स्वरा: इति कथ्यन्ते— |
अच: |
मूर्धन्यवर्णाः— |
टठडढण: |
समाहार:— |
स्वरित: |
इकारस्य वर्णोत्पत्तिस्थानम्— |
तालु |
व्यंजनानाम् अथवा व्यंजनानां संयोगे ............ भवति। |
संयुक्ताक्षरम् |
पद: संधिविच्छेद:— |
संधिता |
फकस्य वर्णोत्पत्तिस्थानम्— |
ओष्ठौ |
अवग्रह— |
लोप: |
अर्धमात्रकालोच्चार्याणां वर्ण:— |
व्यंजनानि |
ङकारस्य वर्णोत्पत्तिस्थानम्— |
नासिका |
इष्यशानाम्— |
तालु: |
हकारस्य वर्णोत्पत्तिस्थानम्— |
कण्ठ: |
स्पर्शवर्णाः— |
कादय: |
अघोषवर्णाः मूर्धा:— |
पकार: |
‘देहली’ इत्यस्य वर्णान् पृथक् पृथक् लिखत— |
द् ए ह ल ी |

0 Comments