TET CASE MEETING : टीईटी आंदोलन की रणनीति पर शिक्षक महासंघों की बैठक आज
महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता के आदेश से देश के करीब 25 लाख एवं प्रदेश के करीब 1.86 लाख शिक्षक परिवारों के समक्ष गंभीर आर्थिक एवं सेवा सुरक्षा का संकट गहरा गया है।
शिक्षक भर्ती एवं टीईटी अभ्यर्थियों के लंबे समय से लंबित मुद्दों को लेकर आज विभिन्न शिक्षक महासंघों और संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में टीईटी आंदोलन को नई दिशा देने, आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने तथा सरकार तक अभ्यर्थियों की मांगों को प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर विस्तृत चर्चा होगी।
बैठक में आंदोलन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा के साथ-साथ प्रदेशभर के अभ्यर्थियों को एकजुट करने की रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि आंदोलन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सुझाव प्रस्तुत करेंगे।
शिक्षक महासंघों का मानना है कि वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रियाओं, रिक्त पदों पर नियुक्ति तथा टीईटी अभ्यर्थियों की समस्याओं के समाधान हेतु अब निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से आज की बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बैठक के बाद आंदोलन के अगले चरण, संभावित धरना-प्रदर्शन, जनसंपर्क अभियान तथा शासन-प्रशासन से वार्ता संबंधी कार्यक्रमों की घोषणा की जा सकती है।
संदेश स्पष्ट है — संघर्ष जारी रहेगा, एकता बनी रहेगी और अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक एवं संगठित तरीके से आगे बढ़ाई जाएगी।
सभी टीईटी एवं शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों से अपील है कि वे संगठन की आधिकारिक सूचनाओं पर ध्यान दें, एकजुट रहें और आंदोलन को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
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